ईरान पर हर रोज़ नए प्रतिबंध, ट्रम्प के विदेश मंत्री का अवैध क़ब्ज़े वाले गोलान हाइट्स और वेस्ट बैंक का दौरा तथा यूएई को 23 अरब डॉलर के हथियार बेचने को मंज़ूरी देना, कुछ इस तरह के क़दम हैं, जो क्षेत्र में टकराव को बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे हैं।
यह सब पूर्व योजना के अनुसार किया जा रहा है। अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने सीएनएन को बताया है कि ट्रम्प, बाइडन के सामने इतनी मुश्किलें खड़ी कर देना चाहते हैं, ताकि वह उनकी नीतियों को पलट नहीं सकें। मध्यपूर्व में चिंगारियां इधर-उधर उड़ रही हैं, लेकिन यमन से ज़्यादा कोई जगह शोलों में नहीं झुलस रही है। बाइडन को कि जो वादा कर चुके हैं कि वह यमन युद्ध से अमरीका का समर्थन वापस ले लेंगे, ट्रम्प दलदल में धंसा देना चाहते हैं।

पिछले क़रीब 5 वर्षों से यमन की बागडोर संभालने वाले और युद्ध में सऊदी सैन्य गठबंधन का मुक़ाबला करने वाले अल-हौसी आंदोलन को ट्रम्प आतंकवादी संगठनों की सूची में डालने का इरादा रखते हैं। ट्रम्प अगर जाते जाते यह क़दम उठाते हैं तो यह दुनिया के सबसे भयानक मानवीय संकट को अधिक अमानवीय रूप देने की तरह होगा। इस क़दम से यमनी जनता तक मानवीय सहायता पहुंचाने का काम पहले से भी ज़्यादा दुश्वार हो जाएगा। हालांकि अल-हौसी आंदोलन पर इसका कोई अधिक प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि उसकी कोई संपत्ति अमरीका में नहीं है और न ही उसका कोई नेता अमरीका की यात्रा पर जा रहा है।
यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस तरह के किसी भी क़दम को पागलपन क़रार दिया है। उन्होंने कहा है कि पहले से ही बदतक स्थिति को और अधिक बदतर बनाने से बचा जाना चाहिए। दुनिया के सबसे भयानक मानवीय संकट में फंसे हुए यमन में अकाल, भयावह रूप ले सकता है, जिससे बहुत ही थोड़े वक़्त में लाखों लोगों की जान जा सकती है।
ट्रम्प के इस फ़ैसले से अल-हौसी आंदोलन को कोई झटका नहीं लगेगा और न ही इससे यमनी जनता के समस्याओं में कोई कमी आएगी, हां, निहत्थी जनता के सिरों पर बम बरसा रहे सऊदी अरब के लिए यह ज़रूर एक गिफ़्ट होगा। रियाज़, अल-हौसी आंदोलन को ब्लैकलिस्ट किए जाने को तेहरान के ख़िलाफ़ एकजुटता के रूप में देख रहा है।
लेकिन इस तरह का रियाज़ के लिए कोई भी गिफ़्ट, बाइडन के लिए सिर दर्द बन सकता है। नवम्बर में एक डिबेट के दौरान, बाइडन ने कहा था कि अगर वह चुनाव जीते और अमरीका के राष्ट्रपति बने तो सऊदी अरब को सुधार देंगे। अमरीकी कांग्रेस में पिछले साल जैसा एक नया बिल, उनके उद्देश्य को पूरा कर देगा, जिसे ट्रम्प ने वीटो कर दिया था।
ट्रम्प प्रशासन द्वारा फैलाई जा रही गंदगी को बाइडन द्वारा तुरंत समेटने की उम्मीद करना भी बेमानी होगी और ऐसी स्थिति में ट्रम्प अगर अल-हौसी आंदोलन को आतंकवादी संगठनों की सूची में डालने का फ़ैसला करते हैं तो समस्या और जटिल हो जाएगी। यह सऊदी अरब और इस्राईल के लिए ट्रम्प का आख़िरी गिफ़्ट और यमन युद्ध में अधिक घी डालने जैसा होगा।